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7 Nov 2025 · 1 min read

रात होने को है

रात होने को है अब,चलो दीया जलाएं।
अंधेरों से डर कैसा,चलो इसे भगाएं

रात के आंचल में, टिमटिमाते हैं तारे
जैसे अपने मन में , ढ़ेरों अरमां प्यारे।

किताबों का दामन थामें, नया कुछ करें
अपने दम पर आगे बढ़े,किसी से न डरें।

अज्ञानता को छोड़कर आगे बढ़ना सीख
मेहनत से फल मिले,देता न कोई भीख।

रात होने को है , इसमें डरने की न बात।
रात के सीने पर ही लिखा होता है प्रभात।

सुरिंदर कौर

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