शुभ प्रभात मित्रो !
शुभ प्रभात मित्रो !
गृहस्थ आश्रम का पालन सबसे बडी तपस्या है । यही सृजन का आधार है । इसी में साधुसेवा और देवसेवा होती है । अतः अपनी गृहस्थी का लालन-पालन जिम्मेदारी से करना ही उचित है ।
जय श्री राधे !
जय श्री कृष्ण !
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