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6 Nov 2025 · 1 min read

गर सारी ज़िंदगानी नाराज़गी में ही गुज़र जाए,

गर सारी ज़िंदगानी नाराज़गी में ही गुज़र जाए,
ये उम्रदराज लोग आखिर जाएं तो किधर जाए
है रोज़-ए-वाकया ग़म का दिल में बसर करना,
जिधर भी सुकून-ए-इश्क़ दिखे बस उधर जाए

©️ डॉ. शशांक शर्मा “रईस”

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