मुक्तक :रिश्ते
कभी बहुत इतराते रिश्ते, और कभी इठलाते रिश्ते।
अधिक मजाक हँसी होती तब, पल भर में खिसियाते रिश्ते।
बन जाती है एक पहेली, ज्यों ही आती बीच सहेली।
रूठ अगर जाता कोई तो, दे उपहार मनाते रिश्ते।।
कभी बहुत इतराते रिश्ते, और कभी इठलाते रिश्ते।
अधिक मजाक हँसी होती तब, पल भर में खिसियाते रिश्ते।
बन जाती है एक पहेली, ज्यों ही आती बीच सहेली।
रूठ अगर जाता कोई तो, दे उपहार मनाते रिश्ते।।