#मुक्तक
#मुक्तक
न आज, न कल।
(प्रणय प्रभात)
“आप या हम ही नहीं सब सोचने पर हैं विवश।
क्या मिटेगा क्या बचेगा, किस तरह कैसे या कब??
ना अज़ल के आशना हैं, ना अबद के जानकार।
कौन है जो कह सके ये, ख़त्म हो जाएगा सब।।”
संपादक
न्यूज़&व्यूज
श्योपुर (मप्र)