गंगा
1
किए तप तो हरिद्वार आई है गंगे
अमिय की लिए धार आई है गंगे
हमारे ये तन मन सभी शुद्ध करती
हमें करने भव पार आई हैं गंगे
2
न गंगा का अपने अनादर करो तुम
न कूड़ा ये कचरा नदी में भरो तुम
कुपित हो गई मां तो क्या फिर करोगे
बुरे कर्म करने से थोड़ा डरो तुम
3
धरा पर प्रबल धार गंगा की आई
खनिज के ये भंडार सँग में है लाई
भगीरथ के तप बल से हमको मिली है
ये करने जगत का है उद्धार आई
डॉ अर्चना गुप्ता
06.11.2025