****खाली हाथ****
****खाली हाथ****
खाली हाथ आया मनुष्य इस धरा पर,
खाली हाथ ही लौटेगा अंत की डगर पर।
ना धन रहेगा, ना मान की माया,
संग केवल कर्मों का फल ही जाएगा।
जो आज गर्व में ताज सजाए है,
कल वही धूल में समाए है।
झूठे अभिमान से क्या पाया रे मन,
जब श्वास भी नहीं अपनी संगवन।
झुकना सीख, मुस्कराकर जीना सीख,
सत्य के दीप से जीवन सींच।
क्यों घमंड करे रे नादान,
जब लौटना है खाली हाथ।
स्वरचित,
रजनी उपाध्याय 🙏🌹