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6 Nov 2025 · 1 min read

****वहम****

पहाड़ को वहम था,
कि सारे क़ाफ़िले उसी ने सम्भाल रखे हैं…
उसकी चोटी पर टिके बादल मुस्कराए,
बोले — “ए अभिमानी! तू तो बस एक ठहराव है,
यात्रा तो उन कदमों की है
जो हर ढलान पर भी चलना जानते हैं।”

हवा ने धीरे से कान में कहा —
“तेरे होने से रास्ता आसान है,
पर मंज़िल तक पहुँचना तेरे बिना भी मुमकिन है।”

पहाड़ चुप हो गया उस दिन,
पहली बार उसने समझा —
ऊँचाई होना महान नहीं,
झुककर राह देना ही असली बल है।

स्वरचित,
रजनी उपाध्याय 🙏🌹

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