सखी तुम चिंतित ना होना
सखी तुम चिंतित ना होना चेहरे की झुर्रियों से
आंखों के नीचे आते काले घेरों से
ये तुम्हारे समझदारी का सफर है
तुम्हारे परिश्रम की निशानियां है
सखी तुम बिखेरना अपनी रोशनी
ढलती शाम में निखरी सुनहरी छठा जैसे
उम्र के इस पड़ाव को मुस्कुरा के अपनाना
झुर्रियों संग आई समझदारी संग इठलाना
खुलकर जीना,खुलकर मुस्कुराना
जो कोई जानना चाहे उम्र की दहलीज
बेझिझक अपनी झुर्रियों को दिखाना
ये तुम्हारे भीतर के आत्मविश्वास संग खिल जाएंगी
काया से कब उम्र ढलती है
उम्र ढलती है मनोबल के टूटने से
तो मनोबल का ताज पहन कर तुम गर्व से कहना
मै रानी हु अपने उम्र संग परिपक्व भावनाओं कि
हा तुम थोड़ा बचपने को ढूंढ लाना
फिर बच्चों सी चहक उठना
देखना दर्पण में खुद को
और अपने भीतर के निडर साहसी स्त्री से मिलकर खुश होना
निरंजना डांगे
बैतूल मध्यप्रदेश