भोर की पुकार
भोग मोह तज क्रोध कामना,
अब जल्दी से भग।
जग तो भ्रम भुलावा माया,
रिश्ते मीठे ठग।
भोर हो गई छोड़ दे शैय्या,
न विलंबकर जग।
करके शुद्धिकरण देह का,
राम भजन में लग।
भजन बिना जीवन यूं सृजन
जैसे फिरता खग।
भक्ती राम की शुचि ऐसे ज्यों,
कुंदन रूपा नग।
भगवन साँच, साँच हैं गुरुवर,
गह ले इनके पग।
सांचा धाम बना है ऊपर,
पकड़ सांच की डग।