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6 Nov 2025 · 1 min read

शुभ प्रभात मित्रो !

शुभ प्रभात मित्रो !
दो विचित्र स्थितियाँ हैं । एक ईश्वर को मानना । दूसरी ईश्वर की बात को नहीं मानना । है न विचित्र बात । हम कहते
तो हैं कि प्रभु सर्व व्यापक हैं पर देखते नहीं । आइये हम अपना अहम् त्याग कर प्रभु की सुनें जो हमारे अंदर ही कहीं छिपा बैठा है ।
जय श्री राधे !
जय श्री कृष्ण !
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