शीर्षक "तेरी कमी"
शीर्षक:- “तेरी कमी” 💔
रचनाकार:- शाहबाज आलम “शाज़”
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साथ गुज़ारे हुए यादगार लम्हे,
आज भी दिल के आईने में चमकते हैं,
हर मुस्कान के पीछे तुम्हारा साया,
अब भी मेरी तन्हाई में बरसते हैं।
वो बातें, वो हँसी, वो मीठी सी शिकायतें,
हर पल जैसे कोई शब्द अधूरा रह गया,
तेरे जाने के बाद ये दिल समझा ज़िन्दगी तो है, मगर कुछ अधूरा रह गया।
हर सुबह तेरी यादों से सज जाती है,
हर शाम तेरे ख्यालों में ढल जाती है,
तेरी कमी इस दिल को हर वक्त
अहसास दिलाती है,
कि मोहब्बत कभी खत्म नहीं होती, बस रूह बन जाती है।।
शाहबाज आलम “शाज़”
(युवा कवि स्वरचित रचनाकार सिदो कान्हू क्रांति भूमि बरहेट सनमनी निवासी )