शीर्षक - मन की सोच
शीर्षक – मन की सोच*
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आजकल की बेटियां बेटे की रुप है
सोच बदलनी है
दमाद न पराया बस बहु न बेटी बनी है।
दमाद तो बेटा बना है।
बस सोच का फर्क तेरा बेटा उसका उसका बेटा तेरा है।
नाम तो माता पिता का वही बताएंगे बेटा बेटी जो होता है।
आओ सोच बदलें बेटी को जन्म से बेटा ही समझते हैं।
जय हो 🚩…….. नीरज 👍