देव दीपावली
देव दीपावली
छिटकी नभ में चाँदनी, कातिक पूनम रात।
काशी के गलियार में, झिलमिल दीपक-पाँत।।
देव दिवाली आज है, कातिक पूनम रात।
करते भू पर देवता, अमरित की बरसात।।
त्रिपुरासुर का अंत कर, दिया इंद्र को राज।
आज मुदित मन झूमता, सारा देव समाज।।
भव्य कलेवर में दिपे, काशी नगरी आज।
देव मुदित आशीष दें,गदगद संत समाज।।
छाई है अद्भुत छटा, दमक रहे सब घाट।
देव दरस की लालसा, जोहें रह-रह बाट।।
पावन गंगा नीर में, कर कातिक स्नान।
देव दिवाली देवता, करते दीपक दान।।
#सीमा