#व्यंग्य-
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■ नहीं मरा है रावण…।
【प्रणय प्रभात】
“पुतला जलते ही भीड़ में खड़े तमाम अभागे।
श्रीराम जी के बजाय रावण की तरफ़ भागे।।
राम लक्ष्मण कोने में खड़े दिखाई देते रहे।
फेसबुकिए रावण के साथ सेल्फ़ी लेते रहे।
हनुमान जी मौन साधे एक ओर खड़े थे।
कई फ़ोटो प्रेमी मेघनाद के पीछे पड़े थे।
नज़ारे ने नज़रिए को आम कर दिया था।
यह संदेश देने का भी काम कर दिया था।
लोगों के दिमाग़ में आज भी बस अधर्म भरा है।
रावण हर साल मरने के बाद भी नहीं मरा है।।”
हर साल का यह कड़वा सच चंद दिनों पहले एक बार फिर से ख़ुद को दोहराता दिखा। गवाह बनीं मीडिया से सोशल मीडिया पर पोस्ट होने वाली तस्वीरें। जिनमें लाख प्रयासों के बाद भी जलने से बचा रावण न सिर्फ़ भीड़ के केंद्र में खड़ा दिखा, वरन उसका क़द हमारे राम जी से इस बार पहले से भी कई गुना बड़ा रहा।
यह किसी एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन का सच है। दुर्भाग्य यह है कि रामराज्य के दावों के बावजूद परिदृश्य लंका जैसे हैं। जहां राम प्रभु के स्वरूप हाशिए पर हैं और रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण केंद्र में।।
●संपादक/न्यूज़&व्यूज़●
श्योपुर (मध्यप्रदेश)
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