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5 Nov 2025 · 1 min read

अरे यहाँ वायदे वफ़ा की बात ना कर

अरे यहाँ वायदे वफ़ा की बात ना कर
ख़ोखले यहाँ इंसान है ऐतबार की बात ना कर II
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बदलते जज़्बात पल-पल यहाँ खामोशियाँ उधार ना कर
फूलों संग ख़ार भी होंगे जान ए ज़िगर हर कहीं निसार ना कर II
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चलता चल सीना चीर के तिमिर का तू
भोर कब तलक होगी यूँ रुक के इंतज़ार ना कर II
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