गीत
गीत
आज हम जलाते हैं ,इक दिया मुहब्बत का ,
इक दिया मसर्रत का ,इक दिया इनायत का ।
आज इक क़सम खाते , साथ हम न छोड़ेंगे,
ज़िंदगी हमारी है , प्यार हम न तोड़ेंगे ,
नफ़रतों की आंधी का ,रुख़ तो हम ही मोड़ेंगे ,
आज कर चले रौशन इक दिया सदाक़त का ,
इक दिया मसर्रत का , इक दिया इनायत का।
देश ये हमारा है ,जान से भी प्यारा है ,
दुश्मनों को मंज़िल से , हम ने ही उतारा है ,
भेद भाव मिट जाएं , हम सभी का नारा है ,
गूंजती हवाओं में , इक दिया नियामत का ,
इक दिया मसर्रत का ,इक दिया इनायत का ।
✍️ नीलोफर ख़ान नील रूहानी,,