दर्द बयां जो तू करे, क्षम्य नहीं यह कर्म।
दर्द बयां जो तू करे, क्षम्य नहीं यह कर्म।
कष्ट सभी निज गेह रख, पुरुष सदा यह धर्म।।
संजय निराला
दर्द बयां जो तू करे, क्षम्य नहीं यह कर्म।
कष्ट सभी निज गेह रख, पुरुष सदा यह धर्म।।
संजय निराला