कशिश
कशिश
दिल में उठती हूक हमेशा याद तुम्हारी लाती है।
कशिश प्यार की ऐसी है जो मेरी नींद चुराती है।
वादे सारे भूल गए जो हमने कभी सजाए थे।
वही पुरानी सारी बातें अब मुझको तड़पाती हैं।
#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’
कशिश
दिल में उठती हूक हमेशा याद तुम्हारी लाती है।
कशिश प्यार की ऐसी है जो मेरी नींद चुराती है।
वादे सारे भूल गए जो हमने कभी सजाए थे।
वही पुरानी सारी बातें अब मुझको तड़पाती हैं।
#डा. राम नरेश त्रिपाठी ‘मयूर’