अच्छी नहीं लगती हमको
अच्छी नहीं लगती हमको, नाखुशी तुम्हारे चेहरे पर।
लगते हो तुम हमको अच्छे, हंसी हो तुम्हारे चेहरे पर।।
अच्छी नहीं लगती हमको————————–।।
दिल में हो कोई दर्द तुमको, नहीं उसको छुपाओ तुम हमसे।
कुछ तो करेंगे कम दर्द तुम्हारा, नहीं शर्माओ तुम ऐसे हमसे।।
करते हैं हम तो यही दुहा, खुश रखें खुदा तुम्हें उम्रभर।
अच्छी नहीं लगती हमको———————–।।
किसने किया है तुम पर सितम, कौन हुआ तुमसे बेवफ़ा।
करता है कौन तुम्हें बदनाम, लूटा है किसने कितनी दफ़ा।।
उसको मिला देंगे मिट्टी में, क्योंकि हम है कुर्बान तुम पर।
अच्छी नहीं लगती हमको———————-।।
गर हमसे हुई हो कोई शिकायत, बेखौफ तुम वह हमसे कहो।
लेकिन बुरा नहीं समझो हमें तुम, खामोश हमसे तुम ना रहो।।
तुम भी तो जी.आज़ाद हो, नहीं कोई पहरा तुम पर।
अच्छी नहीं लगती हमको———————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)