*प्रचलन सदियों से रहा, गंगा नदी-नहान (कुंडलिया)*
प्रचलन सदियों से रहा, गंगा नदी-नहान (कुंडलिया)
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प्रचलन सदियों से रहा, गंगा नदी-नहान
भागीरथ-तप से बना, भारतवर्ष महान
भारतवर्ष महान, स्वर्ग से गंगा लाए
जल यह अमृत विशेष, करोड़ों के मन भाए
कहते रवि कविराय, दिव्य यह भारत का धन
रीति यहॉं जीवंत, नदी-डुबकी का प्रचलन
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451