*जितना तुम अपमान करोगे, उतना ही बल आएगा (हिंदी गजल)*
जितना तुम अपमान करोगे, उतना ही बल आएगा (हिंदी गजल)
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1)
जितना तुम अपमान करोगे, उतना ही बल आएगा
आहत मन यह जीत किसी दिन, अपनी दर्ज कराएगा
2)
नई राह को इस दुनिया ने, सहज नहीं अपनाया है
राही परम धैर्य से अपनी, निश्चित जगह बनाएगा
3)
हमें पता है परम-शून्य में, हैं असंख्य ध्वनि की किरणें
जिन्हें नहीं यह दीख रहा है, कौन उन्हें समझाएगा
4)
मंजिल को पाने के क्रम में, सभी सफल कब होते हैं
चलता रहा निरंतर जो भी, मंजिल वह ही पाएगा
5)
सच की राह चलेंगे हम तो, भले अकेले रह जाऍं
लोभ लोकप्रियता का हमको, हर्गिज नहीं सताएगा
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रचयिता रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज) रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451