दूर दुखों का साया है
जिसने दिल से अपना माना उसपर प्यार लुटाया है।
प्रेम निवेदन किसी व्यक्ति का कभी नहीं ठुकराया है।
संघर्ष भरी जिन्दगी से, हमनें न हार कभी मानी,
हर मुश्किल को हँसकर हमनें अपने गले लगाया है।।
अपने सर पर हाथ हमेंशा मात-पिता का पाया है।
पास मेरे जो कुछ भी है सब ईश्वर की माया है।
कृपा दृष्टि मेरे ऊपर महादेव शिव शंकर की,
उनकी दया दृष्टि के कारण दूर दुखों का साया है।।
कितनीं भी मुश्किल आईं पर हृदय नहीं घबराया है।
देख कभी भी सुन्दर नारी हृदय नहीं भरमाया है।
सत्य सनातन की परिपाटी भूला न संस्कार कभी,
जो भी अच्छा लगा हमें उसको हमनें अपनाया है।।
रूखा-सूखा जो भी पाया प्रेम पूर्वक खाया है।
इसीलिए ही अब तक मेरी स्वस्थ निरोगी काया है।
सबको अपना बंधु मानकर प्रेम पूर्वक रहते हैं,
कभी किसी असहाय पे हमनें जुल्म कभी न ढाया है।।
स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)