हाल पूछने आए थे
हाल पूछने आए थे
एहसान चढ़ा के चले गए,
बड़े अपनापन से मुस्काए,
पर दिल में खंजर दे गए।
कहते थे – “कैसी हो तुम?”
पर सुनने का वक़्त न लाए,
अपनी बातें झोली भर के,
मुझ पर उतार के चले गए।
अब सोचती हूँ बैठ अकेली,
कैसे यह कर्ज़ उतारूँ मैं,
जो आए थे दिल हल्का करने,
वो बोझ बढ़ा के चले गए।
रूबी चेतन शुक्ला