कुण्डलिया!
!! श्रीं !!
सुप्रभात !
जय श्री राधेकृष्ण !
शुभ हो आज का दिन !
🙏
तन-मन-धन तीनों हरे, करती है बदनाम।
पीने वाले को पिये, करती काम तमाम ।।
करती काम तमाम, बला ये बहुत बुरी है।
दारू अति बदनाम, नाश की यही धुरी है।।
कहे ‘ज्योति’ समझाय, हरे यह असमय यौवन।
पीना नहीं शराब, हरेगी यह तन-मन-धन ।।
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महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा !
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