मुक्तक
मुक्तक
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सुप्त सब चाहतें अब जगा दीजिए।
सब वहम आज मन के भगा दीजिए।
साथ कोई कहीं जब मिलेगा नहीं।
प्यार से मन कहीं पर लगा दीजिए।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य
मुक्तक
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सुप्त सब चाहतें अब जगा दीजिए।
सब वहम आज मन के भगा दीजिए।
साथ कोई कहीं जब मिलेगा नहीं।
प्यार से मन कहीं पर लगा दीजिए।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य