काश!
काश!
बड़प्पन के झमेले से बाहर निकल पाते,
खुशियां उन मशीनों में ढूंढ लेते जिसमें पसीने है बहाते,
बना लेते दोस्त कई उंगलियां मिला के,
मनमुटाव होने पर इन्हीं उंगलियों से दोस्ती तोड़ देते।।
काश!
बड़प्पन के झमेले से बाहर निकल पाते,
खुशियां उन मशीनों में ढूंढ लेते जिसमें पसीने है बहाते,
बना लेते दोस्त कई उंगलियां मिला के,
मनमुटाव होने पर इन्हीं उंगलियों से दोस्ती तोड़ देते।।