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3 Nov 2025 · 1 min read

आज क्यों रूठे हो तुम

आज क्यों रूठे हो तुम, इस तरहां हमसे।
दूर हो क्यों तुम आज, इस तरहां हमसे।।
आज क्यों रूठे हो तुम——————-।।

देखो क्या लाये हैं हम, पेश करने को तुमको।
पसंद हो शायद तुमको, खुशी हो शायद तुमको।।
चुराते हो नजर क्यों तुम, इस तरहां हमसे।
आज क्यों रूठे हो तुम—————–।।

हसीन है चेहरा तुम्हारा, शीशे में देखो इसको।
नैन है प्यार का सागर, तुम प्यार करो हमको।।
बात क्यों नहीं करते हो, शिकायत क्या है हमसे।
आज क्यों रूठे हो तुम——————-।।

फूल भी आज उदास है, देखकर चुप तुमको।
चिराग सभी बुझ गये हैं, देखकर चुप तुमको।।
हंसों तुम,यह भी हंसेंगे, भूल क्या हुई है हमसे।
आज क्यों रूठे हो तुम——————-।।

शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)

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