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3 Nov 2025 · 1 min read

कर्मठता श्रेष्ठ गुण

कर्मठता की अग्नि में खिलते हैं कुंदन ।
धर्मशिला पर बैठ कर होते हैं तप पूर्ण।।

निर्बलता का चोला पहनकर ना चलना जीवन पथ।
सबलता का लेपन करके महका लेना तन_मन।।

परिश्रम के हार गले में कुंदन बनकर चमकते है ।
आलस्य भरे स्वर्ण घड़े भी,एक दिन मिट जाते है ।।

यूंही नहीं शीतल जल देता है घड़ा माटी का ।
अग्नि में जलकर स्वयं जान पाता है महत्व शीतलता का।।

जीवन में कर्मठता और धर्म का अनुसरण करते हुए जीवन को गति और खुद को आत्मबल दे ।

निरंजना डांगे
बैतूल मध्यप्रदेश

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