हर संघर्ष करती स्त्रियों को मेरा एक पैगाम।
हर संघर्ष करती स्त्रियों को मेरा एक पैगाम।
हर जीत में छिपी है तुम्हारी पहचान
ये ज़मीं ये आसमां ये हसीं ये मुस्कान
सब गाते हैं सिर्फ तुम्हारी गान।
लाख गिरने पर भी हार जब तुम नहीं मानती।
करती संघर्ष उगते दिनकर से लेकर
ढलती शाम तक।
नहीं देती दिखतीं कभी स्पष्टी करण
तुम अपना।
बात करती हमेशा तुम स्वाभिमान की।
गिड़गिड़ाती नहीं जब तुम अपना
अस्तित्व बचाने को।
रख यकीं अपने कर्म पर करतीं
जब तुम संघर्ष हो।
तब लगती साहसी निडर और
सबसे सुंदर हो।
नतमस्तक हैं हर वो मानुष जिसने जाना
स्वाभिमानी स्त्रियों का संघर्ष है।