*घुलता सॉंसों में जहर, हुए फेफड़े बंद (कुंडलिया)*
घुलता सॉंसों में जहर, हुए फेफड़े बंद (कुंडलिया)
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घुलता सॉंसों में जहर, हुए फेफड़े बंद
धूल-धुऑं फैला हुआ, जीवन की गति मंद
जीवन की गति मंद, श्वास के रोग सताते
दम घुटता हर रोज, खॉंसते सब दिख जाते
कहते रवि कविराय, जिधर देखो व्याकुलता
बचे किस तरह व्यक्ति, हवा में जब विष घुलता
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451