आशुतोष भगवान का, लेकर प्रातः नाम।
आशुतोष भगवान का, लेकर प्रातः नाम।
करता जो निज कर्म है, उसे वरे श्री राम।।
भजते शिव श्री राम को, त्रिपुरारी को राम।
दोनों पूरक ब्रह्म है, भक्तों के हित धाम।।
सुंदर पावन नाम है, भजिए शिव या राम।
भक्ति-भाव दोनों सदा, सफल करें हर काम।।
रामेश्वर विख्यात है, दोनों का शुभ धाम।
मंगल दोनों के शरण, सुखदायी अभिराम।।
वंदन दोनों को करे, “पाठक” नित अविराम।
कर्म निरंतर कर रहा, हृदय बना प्रभु धाम।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)