देखते हैं कितनी दूर तलक जाते हैं ,
देखते हैं कितनी दूर तलक जाते हैं ,
यह अनचाहे ,बोझिल और उबाऊ रिश्ते ।
देख लेना जिंदगी के सफर के दरम्यान ,
बीच में ही न दम तोड़ दे यह रिश्ते ।
चलो ! इनकी सच्चाई तो मालूम हो जाएगी ,
कितने खरे और कितने खोटे थे यह रिश्ते ।
हम नादान थे जो इन पर वक्त बर्बाद करते रहे ,
स्वार्थ और परमार्थ दोनों संवर जाते हमारे ,दोस्तों !
गर निभाते सच्चे दिल और ईमान से ख़ुदा से अपने रिश्ते ।