उसकी बिंदी
मौसम जैसी आँखें उसकी,
कुदरत सा उसका चेहरा है,
झुमके उस पर ऐसे सजते,
जैसे देख लिया दशहरा है।
बादल जैसी बातें उसकी,
सुकून भरी उसकी साँसें हैं,
हज़ार ख्वाहिशें सबकी रहतीं,
और दिल मेरा — उसकी बिंदी पे ठहरा है।
मौसम जैसी आँखें उसकी,
कुदरत सा उसका चेहरा है,
झुमके उस पर ऐसे सजते,
जैसे देख लिया दशहरा है।
बादल जैसी बातें उसकी,
सुकून भरी उसकी साँसें हैं,
हज़ार ख्वाहिशें सबकी रहतीं,
और दिल मेरा — उसकी बिंदी पे ठहरा है।