आखिर ऐसा भी क्या है, तेरी इस सूरत में
आखिर ऐसा भी क्या है, तुम्हारी इस सूरत में।
कि जिसको हम चाहेंगे, बार बार यूँ देखना।।
नहीं हम ऐसे नहीं है, जो करें तारीफ तुम्हारी।
तुमसे यूँ दिल लगाकर, भूखा हमें नहीं मरना।।
आखिर ऐसा भी क्या है———————।।
खूबसूरत यूँ खुद को, समझकर मत बनो मग़रूर।
अपने इस हुस्न पर इतना, करो नहीं तुम यह गरुर।।
तुमको ताकीद करते हैं, खबर तुमको यह सुनाते हैं।
कि हमको यूँ अपना तुम, दीवाना नहीं समझना।।
आखिर ऐसा भी क्या है———————।।
खूबसूरत अब हमको, बनाना है यह चमन अपना।
मुकम्मल होगा इस तरहां, हमारा प्यारा एक सपना।।
मिटा दो वहम यह अपना, कि तुम हो ख्वाब हमारा।
नहीं, हमको तेरे इस प्यार में, बदनाम नहीं बनना।।
आखिर ऐसा भी क्या है———————।।
कितने पागल है वो लोग, लगाकर दिल सूरत पर।
तोड़ देते हैं सभी रिश्तें, दीवाना होकर सूरत पर।।
उनको देंगे हिदायत हम, कि वो भूलें नहीं खुद को।
अच्छा बनाये जीवन को, अच्छा काम है करना।।
आखिर ऐसा भी क्या है———————।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)