कह प्यासा कविराय
एक कुंडलियां
कविता की कमनीयता, मनवा तर कर जाय ।
पढ़ते सुनते यो लगे, स्वप्नलोक हो आय।।
स्वप्नलोक हो आय,कवि संग झूमे खेलें।
ऐसा कवि का भाव,रस शब्दों में उढ़ेले।
कह प्यासा कविराय, छंद छाये ज्यों सविता।
ऐसा भारत देश,कवि और उनकी कविता।।
✍️ प्यासा