स्नेह पुष्प वंदन (अवतरण दिवस विशेषांक)
आए संदेशे बहुत सारे,
पर तेरे बिना अधूरे लगे हैं।
अवतरण दिवस विशेष रहा,
फिर भी सुख के सिरे खुरदुरे लगे हैं।
तेरी यादों की मृदुल तरंगें,
मन के सागर में गहराए हुए हैं।
आँखों में अश्रु मोती भरे,
तेरे स्मृति–ज्योति जलाए हुए हैं।
प्रेम–गंगा की पावन धार,
तेरी निश्छल वाणी बहाए हुए है।
सखी, तुम जीवन की धारा रही,
हम भंवरों में डुबकी लगाए हुए हैं।
प्रकृति की माया अनोखी बड़ी,
स्पंदन ज्ञान–दीप जलाए हुए है।
पश्चाताप–भीगे उर में अब,
सखी, स्नेह–समिधा सजाए हुए है।
यही सार–गर्भित वंदन मेरा,
तेरे चरणों में अर्पण हो जाए
तेरी भक्ति में आज हमारा,
मन याचक बन पूजन गाए।