चाभी
मन के भीतर
बंद है
अनगिनत
कुंठित लम्हे
उलझी बातें
टूटे ख़्वाब
उधड़ी यादें
खंडहर हुई
मन की इमारत
सीली, जली हुई
दीवारों में
पुराने मज़बूत
दरवाज़े
उन पर लगे
ताले
और एक दिन
कुछ ऐसा हुआ
एक चाभी ने
खोल दिए
सब ताले
आज़ाद हो गए
सभी लम्हे ख़्वाब
बातें और यादें
खाली हो गया
मन
नाच उठा तन
बढ़ गया ओज
समाप्त हुई खोज ।