*इश्क़ का नशा*
जो नशे में है वो सबसे बड़े धोखे में है,
क्योंकि असली नशा तो तेरी आँखों में है,
नादान है वो, इतना भी नहीं जानते,
न उतरने वाला नशा तो तेरी बातों में है।
शराब की बोतलें तो खाली हो जाती हैं,
और तेरे लबों की बातें दिल में उतर जाती हैं,
जो तेरी मुस्कान का एक जाम पी ले,
उसे फिर किसी और नशे की ज़रूरत कहाँ रह जाती है।
तेरी ज़ुल्फ़ों की छाँव में सुकून है ऐसा,
जैसे हो तपती धूप में ठंडी हवा का झोंका,
तेरी चाल में है मदहोशी का आलम,
हर मोड़ पर लगता है जैसे कोई ख़ूबसूरत धोखा।
जो तेरी आँखें झुक जाएँ तो अँधेरा छा जाए,
जो तू उठे तो सुबह भी मुस्कुरा जाए,
तेरी नज़रें जब मुझे देख लें ज़रा भी
तो लगता है जैसे सारी दुनिया मिल जाए।
नशा वो नहीं जो होश छीन ले,
नशा वो है जो ज़िंदगी में जोश घोल दे,
तेरी बातें, तेरे हँसने का अंदाज़,
हर दर्द को पलभर में मिटाकर रख दे।
नशा कोई भी हो, कुछ पल ही रहता है,
पर तेरे इश्क़ का नशा तो उम्रभर रहता है,
जिसने पी लिया कभी इश्क़ का एक क़तरा,
वो हमेशा फिर इश्क़ में ज़िंदा रहता है।
तेरी आँखों का काजल बयान करता है सारी कहानी,
कितनों की नींदें लूटी है इसने, कितनों की जवानी,
लोग शराब के पैमाने गिनते रहे,
और हम तेरी मुस्कान में खोते रहे रानी।
हर नशा तेरी अदाओं के आगे फीका है,
तेरी चाल में भी कोई जादू-सा लगता है,
कह दो उन नशेबाज़ों से जो घूँट गिनते हैं,
असली नशा तो तेरे दीदार में मिलता है।
तेरा नाम लेते ही दिल धड़क उठता है,
तेरी यादों से मौसम बदला बदला सा लगता है,
तू पास है तो ज़िन्दगी रौशन है मेरी
तू दूर होता है तो सारा जहाँ धुंधला सा लगता है।
नशे से मिटते हैं होश, मगर तू होश में लाती है,
क्योंकि तेरी आँखें किसी को जीना सिखाती हैं,
तू भी इश्क़ में गिरफ़्तार होकर देख एक बार,
जान जाएगा कि ये इश्क़ की खुमारी सारे नशों की लत छुड़ाती है।