हरियाणवीं योगसूत्र (HARYANVI YOGSUTR)
हरियाणवीं योगसूत्र
ज्यब चित्त की वृत्तियां का निरोध होज्या, सै, तै उस चित्त की हालत किसी हो सै? इसका जवाब महर्षि पतंजलि इस आगले सूत्र म्हं न्यूं देवैं से-
तदा द्रष्टुः स्वरूपेऽवस्थानम्।।3।।
द्रष्टा आत्मा उस समाधि की दशा म्हं,
अपणे स्वरूप म्हं ठहर जावै सै।
मल अर विकार रूपांतरित होज्यां,
परमानंद नैं फेर वो खूब पावै सै।।3