आज देव एकादशी, नारायण का जाग।
आज देव एकादशी, नारायण का जाग।
चतुर्मास की नींद का, कर देते हैं त्याग।।
नारायण करते शयन, लेते जब विश्राम।
परिणय प्रवेश रोक कर, करते सब आराम।।
नारायण के जाग से, मन है हुआ प्रसन्न।
लंबित जितने कार्य शुभ, अब होगा संपन्न।।
नारायण की जय करें, जागे कृपा निधान।
कार्य त्वरित शुभ सर्वदा, अब होगा लो मान।।
नारायण श्रीपति सदा, “पाठक” के जब संग।
जीवन सुखमय हो सहज, हर-पल भरा उमंग।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)