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31 Oct 2025 · 1 min read

उफ़! कितना शोर है ज़हन में ,

उफ़! कितना शोर है ज़हन में ,
जैसे ख्याल आपस में उलझ रहे हो ।
कौन यहां किसको समझाए ,
जब दिल और दिमाग दोनों ही नासमझ हो ।

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