उफ़! कितना शोर है ज़हन में ,
उफ़! कितना शोर है ज़हन में ,
जैसे ख्याल आपस में उलझ रहे हो ।
कौन यहां किसको समझाए ,
जब दिल और दिमाग दोनों ही नासमझ हो ।
उफ़! कितना शोर है ज़हन में ,
जैसे ख्याल आपस में उलझ रहे हो ।
कौन यहां किसको समझाए ,
जब दिल और दिमाग दोनों ही नासमझ हो ।