बदलो अब सोच तुम अपनी
बदलो अब सोच तुम अपनी, तस्वीरे-हाल-ए-तक़दीर।
तरीका जीने का बदलो, अदबो-रस्मों की यह तस्वीर।।
बदलो अब सोच तुम अपनी——————–।।
तुम्हारी इस अकीदत पर, नहीं एतराज कुछ हमको।
लेकिन जिसने किया उपकार, नहीं भूलो तुम उसको।।
समझो तुम कुछ हकीकत भी, कौन रहबर है कौन शातिर।
बदलो अब सोच तुम अपनी——————–।।
वफ़ा तुमने तो निभाई, होकर बेदम भी अक्सर।
मिला नहीं कुछ तुम्हें उससे, सितम ही हुए तुम पर।।
छोड़ो अब साथ तुम उनका, बताना उनको अपना पीर।
बदलो अब सोच तुम अपनी———————–।।
हिम्मत तुम हारो नहीं, हार से तुम नहीं होना निराश।
तुम भी बन सकते हो सिकंदर, ऐसा तुमको हो विश्वास।।
करो नहीं जी हुजूरी अब तुम, तोड़ो गुलामी की जंजीर।
बदलो अब सोच तुम अपनी———————–।।
कहो नहीं उनको तुम अपना, मालिक तक़दीर-ए-जिंदगी।
मेहनत से क्या नहीं होता, मेहनत एक नाम है जिंदगी।।
सुधारो तुम भी अपना जीवन, सँवारो अपनी तुम तक़दीर।
बदलो अब सोच तुम अपनी———————–।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)