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31 Oct 2025 · 1 min read

#मुक्तक-

#मुक्तक-
■ रतजगे का दम।
【प्रणय प्रभात】
“एक झंझावात है साँसों से धड़कन तक अभी,
सोचता हूँ इस समय ने क्या अधिक क्या कम लिया।
काल-कवलित हो गए कुछ स्वप्न शैशवकाल में,
रतजगों ने नींद को वनवास दे कर दम लिया।।”
👌👌👌👌👌👌👌👌👌
संपादक
न्यूज़&व्यूज
(मध्यप्रदेश)

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