*भारत की जनजातीय विरासत*
भारत की जनजातीय विरासत
गोंड भील संथाल मुण्डा, खासी गारो और नागा।
मीणा उरांग हो भूटिया, इनसे देश लगे जागा।
कला शिल्प भाषा संस्कृति, कढ़ाई-बुनाई, नृत्य संगीत।
जनजातीयाँ हैं मान हमारा, क्यों लगती हैं आज भयभीत।
सीखो इनसे संघर्ष करना, हस्तकला का सुंदर ज्ञान।
मिलजुल कर ये समूह में रहतीं, संस्कृति है इनसे महान।
आज भी इनसे जीवित लगती, कला कहानी और प्रथाएँ।
देश में इनकी गौरव गाथाओं का, आज भी सम्मान है।
भारत की जनजातीय विरासत, विश्व में आज महान है।।१।।
पारंपरिक ज्ञान विज्ञान का, इनका अलग है शिष्टाचार।
आए कितने बदले रंग, इनका न बदला व्यवहार।
संघर्षशील है जीवन इनका, कला कौशल में हैं आगे।
विपरीत रहती दशा हमेशा, सामना करना सिखलाते।
आन-बान और शान की लड़ी लड़ाई, बने नहीं वो खलनायक।
एकलव्य बिरसा मुण्डा, रानी माईदिनल्यू भीमा नायक।
असी राजू कानू मुर्मू सिद्धू, गोविंद गुरु लक्ष्मण नायक।
आज जल जंगल जीवन इनकी, यही आन-बान-शान है।
भारत की जनजातीय विरासत, विश्व में आज महान है।।२।।
भिन्न-भिन्न भाषा निश्चित भूभाग, प्रकृति से घनिष्ठ संबंध।
संरक्षण हो जनजातियों का, सरकार करे उचित प्रबंध।
समाज का ये भी अभिन्न अंग हैं, इनका भी हो साथ यशगान।
देश को आजाद करने में था, इनका भी विशिष्ट स्थान।
मुख्य धारा में शामिल हों ये, सरकार का है सतत प्रयास।
शिक्षा स्वास्थ्य आवास योजना, रोजगार से बनेगी बात।
जल जंगल और जीवन इनका, बचाओ समान अधिकार है।
दुष्यन्त कुमार कहता सबसे, इनकी कला का हर जगह सम्मान है।
भारत की जनजातीय विरासत, विश्व में आज महान है।।३।।