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31 Oct 2025 · 1 min read

कुंडलिया. . . . .

कुंडलिया. . . . .

किसने जाना आज तक, मानव मन का भेद ।
सुख की गागर में करें, अपने ही सौ छेद ।।
अपने ही सौ छेद , सत्य कब मन पहचाना ।
अंतस का विश्वास, छले अब आज जमाना।।
खाकर गहरी चोट , लगे फिर आँसू रिसने ।
इस मानव का भेद , यहाँ पर जाना किसने ।।

सुशील सरना / 31-10-25

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