कागज़ पर खुशहाली है
कागज़ पर हैं रोड चकाचक,
कागज़ पर ही नाली है।
कागज़-कागज़ खेले जनता,
कागज़ पर मतवाली है।।
कागज़ पर ही इंद्रासन है,
होली और दीवाली है।
कागज़ पर हैं गाँव चमकते,
कागज़ पर खुशहाली है।।
कागज़ पर है सबकुछ अच्छा,
जनता नहीं सवाली है।
लूट-लूट कर कागज़ गिनते,
उनके मुख पर लाली है।।
कागज़ का घोड़ा दौड़े तो,
बजती सौ-सौ ताली है।
कागज़ पर ही स्वर्ग बना पर,
मौके पर बदहाली है।।
– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 30/10/2025