बिसावर की कुंडलियाँ
उपजें मन मस्तिष्क में, अहंकार से रोग।
अपनाते जो तंत्र को, रहें सुखी वे लोग।
रहें सुखी वे लोग, समझ जीवन का सिस्टम।
अधिक उठाते लाभ, खपाते जीवन-धन कम।
कहे ‘बिसावर’ मीत, स्वयं ईगो से उबरें।
अहंकार से रोग, कई तन-मन में उपजें।।