चांद तारे फलक पे आए हैं
चांद तारे फलक पे आए हैं
साथ में रात भी ले आए हैं
राज काजल छुपा नहीं पाया
आंख में कुछ गमों के साए हैं
दाद की जिससे भी तवक्को थी
वो ही तनकीद करने आए हैं
मुझसे शम्सो कमर की बन न सकी
जुगनुओ के भी हम सताए हैं
एक लम्हे में सानिहा गुजरा
जिसको बरसों न भूल पाए हैं