नील गगन के तले
नील गगन मेघा के नीचे
निखरा जीवन फूले फले
सुख दुःख से भरा निराला
बस्ती है मस्ती में मतवाला
लाल अम्बर तारों की पुतली
सांझ उषा की आँख मिचौली
सूर्य अस्त में पहाड़ों की मस्ती
सूनी डगर सूनी राह नगरिया
चेतना संवेदना भरी सफ़र पे
दर्द वेदना तनाह मुस्काराना
ममता स्नेह की शहर वादियाँ
सुन्दर सलौना स्वच्छ हवायें
परदेशी आ घूमता फिरता
श्रम भाग से अर्थ भरता है
सौम्य स्वर अद्भूत मनोहर
विप्लव सृष्टि वृष्टि सुहानी
जीवन सुखमय नव चेतन
खोना ना आलोक उदय में
निस्तब्ध गगन समीर शान्त
व्यथा कथा निलय की वाणी
तट अधीर उन्मुक्त गगन में
नीला अंजन अनन्त शून्य
विकल चंचल भव भंजन
चिर विषाद विच्छुब्द मन
उषा निशा की ज्योति रेखा
सुरभित छाया नीले नभ में
निराश नयन आँसू सूखा है
आशा की उजयाली सपने
बिखरी सुख लहरी संध्या में
नील गंगन कुसुमों की बगिया
फलता फूलता माया की काया।
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टो .पी . तरुण